फागुन की रिमझिम फुहार में भीज गयो मन मोरा, जग में होवे केवल होरी बृज में होवे होरा। बृज में होवे होरा रसिक जन गीत गामते, थारी भर-भर बृजवासी सब भेंट लामते॥


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