और श्रद्धेय अनुराग कृष्ण शास्त्री एक ऐसे ही जमाने के, आज की पिढी के महापुरुष है, जो धर्म के इसी
धर्म संकट का उत्तर है।
युवा पीढी उनकी उम्र में अपना प्रतिबिंब ढूंढ पाती
है। उनके शिक्षित तर्क मे अपने सवालो का जवाब खोज
पाती है। युवाओं के अलावा
बड़ी उम्र के लोग एवं सत्संग में वर्षों से
लीन हर उम्र के नर-नारी, उनके
ज्ञान भंडार जो एकत्रित किया
है, उन्होने
वर्षों की गुरुभक्ति, भगवान
की आराधना, ग्रन्थों के
गूढ अध्ययन एवं माता-पिता के आशीर्वाद से, वह कुछ नए
मोती हर बार पा जाते
है।
आपने गोवर्धन-गिरि के सान्निध्य में, चैत्रीय
नवरात्री में मौन उपवास के साथ श्री गिरिराज की तलहटी में उन्ही
के नि:स्पृह स्वरूप पं० सन्त श्री गया प्रसाद जी महाराज के
आध्यात्मिक विग्रह के सम्मुख श्रीमदभागवत महापुराण का संस्कृत
वाचन, परमपूज्य श्री रामदास "काकाजी" की सन्निधि में किया तथा
पं० पू० कार्ष्णि स्वामी श्रीगुरुशरणानन्द जी महराज का शुभाशीष
प्राप्तकर अष्टोत्तरशत् (१०८) श्रीमद्भागवत के भव्य-आयोजन
द्वारा कथा यात्रा प्रारम्भ की। तदुपरान्त, अपनी नानी माँ के
आध्यात्मिक विग्रह के समक्ष श्रीमद्भागवत महापुराण का वाचन कर
शुभाशीर्वाद प्राप्त किया। आपकी
भक्ति भावना को देखकर उदयाचल (समाज
सेवी संस्था) राजनाँदगाँव (छ.ग.) द्वारा "युवा सन्त" के रूप
में सम्मानित किया गया। इन सबके परिणामस्वरूप आपका प्रखर
व्यक्तित्व हमारे सम्मुख है और उनकी अमृतवर्षणी वाणी से हम सब
स्वयं को कृतार्थ समझते हैं।
कन्हैयाजी
का हमारे पवित्र ग्रन्थों एवं पुराणों का सार समझाने के अपना विशेष अन्दाज
है। बडी सरलता से, सहजता से वह हर किसी
को गूढ से गूढ बात
सरलता से समझाते है। चाहे श्रीमदभागवत के मुश्किल तर्क हों
या रामचरितमानस
की सरल चौपाई के अन्दर व्याप्त सार
की बात हो, वह हर इन्सान को उसकी
समझ का अनुमान लगाकर उसी
के अनुसार अपना सन्देश ढालकर उस तक पहुँचा देते है. चाहे आप उन्हे १५० लोगो की पारिवारिक
कथा में बैठकर सुने
या ८०,००० लोगो के हुजूम का हिस्सा बनकर, हर श्रोता को ऐसा
ही लगता है मानो सारी कथा उन्होने उसके लिये
ही की है, कोई भी सुनने वाला आपकी
ज्ञान गंगा की पवित्र
धारा से अछूता नही रहता।
कथा समझाने के लिये रसप्रद किस्से,
कहानियों से लेकर
कबीर के दोहे, हरिवंशराय बच्चन की रचनाये, वह हर गहरी बात के मर्म को, हर कठिन सवाल के भावार्थ को बडी ही सरलता से हर
सत्संगी तक पहुँचा देते
हैं।
उनका जीवन भागवत प्रेम में लीन एक
खूबसूरत यात्रा
है। भगवान को पाने की मन्जिल
की ओर, और अपने प्रवचनों, अपनी कथा के द्वारा वह हम सब को मौका देते हैं, कुछ कदम उस यात्रा मे
सम्मिलित होने को...
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